इस उपन्यास में मालवा का भूगोल तो है, मगर उससे कहीं ज्यादा है मालवा का मन- उसकी हंसी, उसका दुख-सुख, उसका लोक और उसका विनोद। यह सब इसे एक उपन्यास से आगे ले जाकर एक यात्रा की डायरी बना देते हैं।
यह बस वही है जो मालवा में मेरी आंखों ने देखा, मेरे कानों ने सुना और मेरे भीतर गहराई तक उतरा। अगर इसे पढ़ने हुए किसी पाठक को अपने ही जीवन का कोई कोना याद आ जाए, अगर उन्हें लगे कि मालवा नहीं बल्कि उनका अपना घर है- तो यही इस उपन्यास की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
लेखक परिचय-
किशन प्रणय समकालीन हिन्दी, राजस्थानी और मालवी साहित्य के उभरते हुए युवा कवि, उपन्यासकार एवं साहित्यकार हें। मूलतः कोटा, राजस्थान से संबंध वाले किशन प्रणय बहुभाषिक रचनात्मकता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं।
हिन्दी में अब तक उनके चार काव्य संग्रह और एक प्रतिवेदन प्रकाशित हो चुके हैं। राजस्थानी भाषा में उन्होंने तीन काव्य संग्रह, एक व्यंग्य संग्रह, एक उपन्यास तथा एक कथेतर गद्य पुस्तक का लेखन किया है। मालवी भाषा में भी उनका एक उपन्यास प्रकाशित होकर सराहना प्राप्त कर चुका है।






Reviews
There are no reviews yet.