Jijivisha | जिजीविषा

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ये कहानी इसलिए पढ़ी जानी चाहिए कि इसे एक पिता ने अपनी बेटी के साथ जिया है। परदेस में, एक दिन अचानक, एक स्ट्रोक से पूरा जीवन बदल जाता है। पीड़ा से शुरू ये कहानी सहानुभूति से गुजरती हुई जिजीविषा का लेख बन जाता है। इसमें कुछ डायरी शैली है, कुछ जानकारी देने का क्रम, कुछ सब समेट लेने की चाहत। आंतरिक दर्द के साथ मुरझाती बेल को दुबारा हरे होते देखने की उत्कट इच्छा। कष्ट के दिन बीतने के बाद भविष्य की चिंता, समकाल की बुहारी और फिर फिर जीवन में विश्वास।

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Additional information

Binding

Paperback

Language ‏

Hindi | हिंदी

Number of Pages

366

Publisher

Antara Infomedia Pvt. Ltd.

Author

Mahesh Chandra Sharma

ISBN-10

819498128X

ISBN-13

978-8194981282

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