सभ्यता की अंतिम सांसों में उच्चरित होती ध्वनियों-सी ये कविताएं किसी थकी हुई हवा के बीच जीवन के उन संकेतों जैसी भी हैं जो भले ही आंखों से ओझल होते जा रहे हों पर नदी में बचे हुए जल की स्मृति की सतह पर उनके मौन बिम्ब अब भी झिलमिला रहे हैं। यह मौन झिलमिलाहट ही इन कविताओं को प्रकाशित कर रही है।
लेखक परिचय-
किशन प्रणय समकालीन हिन्दी, राजस्थानी और मालवी साहित्य के उभरते हुए युवा कवि, उपन्यासकार एवं साहित्यकार हें। मूलतः कोटा, राजस्थान से संबंध वाले किशन प्रणय बहुभाषिक रचनात्मकता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं।
हिन्दी में अब तक उनके चार काव्य संग्रह और एक प्रतिवेदन प्रकाशित हो चुके हैं। राजस्थानी भाषा में उन्होंने तीन काव्य संग्रह, एक व्यंग्य संग्रह, एक उपन्यास तथा एक कथेतर गद्य पुस्तक का लेखन किया है। मालवी भाषा में भी उनका एक उपन्यास प्रकाशित होकर सराहना प्राप्त कर चुका है।






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