| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
|---|---|
| Binding | Hardcover |
| Language | Hindi | हिंदी |
| Number of Pages | 248 |
| Publisher | Radhakrishna Prakashan |
| Author | Yashwant Vyas |
| ISBN-13 | 9788171194414 |
Apne Gireban Mein | अपने गिरेबान में
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Apane Gireban Men : Study under Birala Journalism Fellowship . A rare work in Hindi analysing Changing face of regional press. Published by Radhakrishna Prakashan.
क्षेत्रीय पत्रकारिता के बदलते चेहरे पर हिंदी में अपने किस्म का पहला और सर्वाधिक चर्चित अध्ययन । अख़बारों के कलेवर, मुद्रण, प्रसार, विचार और संपादक संस्था विलक्षण विश्लेषण ।
बाज़ार, पाठक तथा व्यावसायिक मूल्यों पर स्वामी- संपादकों से सीधी बात, पाठकों से सर्वे और उपलब्ध प्रकाशनों की तार्किक पड़ताल ।
कोई जमाना था जब दिल्ली से निकलने वाले अखबार राष्ट्रीय और लखनऊ-लुधियाना से निकलने वाले अखबार क्षेत्रीय कहे जाते थे। हिंदी अखबारों की दुनिया इस बीच बहुत बदल चुकी है। सैटेलाइट संस्करणों ने जो महादृश्य उपस्थित किया है उसने हिंदी अखबारों की बाजार शक्ति की नए सिरे से पहचान कराई है। पारंपरिक अर्थ में गढ़ कहे जाने वाले, ध्वस्त हो रहे हैं। संपादक और स्वामी के पारस्परिक रिश्तों ने नई शक्ल ले ली है। जबर्दस्त पूँजी निवेश, आक्रामक बाजार नीति तथा पत्रकारिक फैशन परेड का नया पैकेज सामने आ रहा है। प्रसार की उछाल में पाठक के लिए नए विकल्प खुले हैं। लेकिन क्या यह नई दुनिया सचमुच एक अद्भुत दुनिया है?
एक रचनाकार होने के साथ-साथ, पत्रकारिता की उसी बदलती हुई दुनिया के अनुभव का हिस्सा होते हुए यशवंत व्यास जब क्षेत्रीय पत्रकारिता में बदलाव को आँकते हैं तो उनकी दृष्टि गहरी संवेदना से युक्त होती है। वे निरंतर हो रहे परिवर्तनों को गहन अनुभूतियों तथा स्पष्ट तथ्यों के बीच दर्ज करते हैं। इसके लिए वे न सिर्फ भाषा के स्तर पर बल्कि प्रस्तुति पर भी शोध को नया, ताज़गी-भरा आकार देते हैं। अंतर्विरोधों की पहचान के प्रति पैनी दृष्टि तथा क्षेत्रीय पत्रकारिता में सफलता असफलता की गंभीर पड़ताल करने की कोशिशों जैसी खूबियों के चलते ‘अपने गिरेबान’ में समकालीन क्षेत्रीय हिंदी पत्रकारिता पर एक विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है।
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